सीतामढ़ी- संस्था बज़्म ए शम्स के तत्वधान में मेहसौल स्थित कार्यालय में विचार गोष्ठी एवं मुशायरा व कवि सम्मेलन आयोजित हुई।

0
47

जिसकी अध्यक्षता संस्था के अध्य्क्ष मो अलाउद्दीन बिस्मिल ने, जबकि संचालन गीतकार गीतेश ने की। विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने स्व मसुउद शम्स के व्यकितत्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। मुस्लिम सिटीजंस फार एम्पावरमेंट के अध्य्क्ष मो कमर अख्तर ने उनकी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उर्दू साहित्य जगत में उनके योगदान को भुलाया नही जा सकता। उर्दू के विकास एवं उत्थान के लिए वह हमेशा प्रयासरत रहे। वह बहुत अच्छे शायर के साथ साथ अच्छे लेखक भी थे। संस्था के अध्य्क्ष अलाउद्दीन बिस्मिल ने उन्हें याद करते हुए कहा कि आज उनकी 11वीं पुण्यतिथी है। 11 वर्ष पूर्व हमलोगों ने उर्दू साहित्य के नामवर व्यकितत्व को खो दिया था। स्व मसउद शम्स के जन्म तिथि 4 फरवरी पर उर्दू साहित्य के बहुमूल्य योगदान के लिए शम्स पुरुष्कार से सम्मानित किया जायेगा।
मुशायरा व कवि सम्मेलन में गीतकार गीतेश ने अपनी रचना,” हो सके तो बेसहारों का सहारा बनकर देखिए, भंवर में जो फंसे हैं उनका किनारा बनकर देखिए”, कवि कृष्णनंदन लक्ष्य ने,”छलकते आंसू को विराम तो दे दो,मेरे संग तुम अपना नाम तो दे दो”, संस्था के अध्य्क्ष मो अलाउद्दीन बिस्मिल ने ” कल तक हमारे साथ थे अब दूर हो गये, था फख्र हमको जिन पे वो मगरूर हो गये ने पढ. वाहवाही बटोरी। वहीं शायर शमीम कासमी ने,” दर्द देने की कभी भूल नहीं करते हम,अपनी खुशीयों से ही दुश्मन को रूला देते है”, मो ईमाम अली ने” जो रहबर था वही गद्दार हो गया,माहौल अब कितना बेकार हो गया”, शराफत अली दिलकश ने ” नफरतें दिलसे मिटाना चाहीए, प्यार की शमएं जलाना चाहिए”, गुफरान ने ” क्या देखते हो लोगों चेहरे की सजावट को, इस दौर के आईने का हर शक्ल स्याही है” पढ़ लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here