प्राचार्य डॉक्टर दिनेश्वर प्रसाद ने कोरोना काल में रचा इतिहास।

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पटना से मनोज सिंह के साथ सनोवर खान की रिपोर्ट।

बिहार की राजधानी पटना आयुर्वेदिक कॉलेज अस्पताल के 96 वें स्थापना दिवस के अवसर पर वैश्विक महामारी के समय 2 दिनों के सेमिनार ,वेबीनार कार्यक्रम के अवसर पर लोगों के बीच औषधीय पौधों का महत्व बताकर कॉलेज को आकर्षण का केंद्र बना दिया। आम जनमानस में यह भाव दिखने लगा कि पौधे हमारे दवा के रूप में जीवन को कितना प्रभावित करते हैं
इस अवसर पर पहली बार पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह नेअपने संबोधन भाषण में पौधे के महत्व एवं दवा मे इसका होने वाले उपयोग के बारे में बताएं। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द राजधानी के पार्कों में औषधीय पौधों को लगाया जाएगा । अब वन विभाग इस दिशा में तेजी से अपना काम करेगा ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिले।
स्वास्थ्य विभाग में राज्य आयुष समिति के विशेष सचिव अरविंदर सिंह ने कहा कि जल्द ही शिक्षकों की समस्या कॉलेज में दूर की जाएगी और जो भी समस्या अस्पताल में है उसका शीघ्र ही निराकरण किया जाएगा हांलाकी आज भी इस अस्पताल में मरीजों को बहुत कम दवाई उपलब्ध हो पाती है, अधीक्षक स्तर पर इसके लिए पूरा प्रयास जारी है ताकि सभी तरह की दवाइयां अस्पताल में उपलब्ध हो जाए, ज्यादातर दवाई मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती है। कुछ चिकित्सक जानबूझकर बाहर से दवा खरीदने के लिए प्रेरित करते हैं।
इस अवसर पर अस्पताल के अधीक्षक डॉ विजय शंकर दुबे ने बताया कि मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और कॉलेज उत्तरोत्तर विकास कर रहा है।
स्थापना दिवस के इस शुभ अवसर पर अनेक गणमान्य डॉक्टर, शिक्षक एवं कालिदास रंगालय के महासचिव एवं विद्या भारती बिहार के कोषाध्यक्ष कुमार अनुपम के अलावा समाजसेवी एवं छात्र उपस्थित थे।

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