पत्रकारिता और विधायिका के साथ असंसदीय व्यवहार लोकतंत्र पर कुठाराघात:डॉ मिथिलेश

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भा ज पा बिहार के मीडिया संपर्क प्रमुख डॉ मिथिलेश कुमार ने बीते दिनों सीतामढ़ी के मीडिया के लोगों के साथ कतिपय दुर्व्यवहार पर चिंता प्रकट किया और कहा इस प्रकार मीडिया कर्मियों के साथ किसी प्रकार का दुर्व्यवहार किया जाना, कलम पर प्रहार के रूप में सभी शिक्षित वर्ग इसे ले रहे हैं।पत्रकारिता पर हमला,विचारों पर हमला के समान है।विधायिका और पत्रकारिता ही आज के परिवेश में लोकशाही के ऐसे स्तंभ है,

जो आम जनता तथा शासन-प्रशासन को समय समय पर प्रजातांत्रिक तरीकों से गुमराह होने से बचाते हैं।पत्रकारिता का देश की आजादी के जंग में भी अविस्मरणीय भूमिका रही है।पत्रकारिता ही एक ऐसा माध्यम है,जो एक देश से दूसरे देश के सम्बंध,व्यापार,राजनीति,सहयोग,आविष्कार,एवं विश्व बंधुत्व को स्थापित करने में अपनी महती भूमिका अदा करता है।”कलम देश की बड़ी शक्ति है,भाव जगाने वाली,दिल ही नही दिमागों में भी आग लगाने वाली।एक जिम्मेवार जनप्रतिनिधि होने के नाते,मैं कलम के सिपाही पर किसी दुर्व्यवहार का पुरजोर विरोध करता हुँ।तथा किसी तबके को अवैधानिक तरीकों से दबाने की कोशिश की गई,तो मैं हर संघर्ष में उसके साथ खड़ा रहुँगा।पत्रकारिता और विधायिका अगर मूक दर्शक की भूमिका में आ जाये,तो स्वतंत्रता की बलिवेदी पर प्राण न्योछावर करने वाले उन महान विभूतियों के सपनो का क्या होगा?

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