पटना के सभी यातायात पोस्ट के प्रभारी है पैरवी से परेशान।

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रिपोर्ट- मनोज कुमार सिंह/ सनोवर खान

भट्टाचार्या यातायात पोस्ट के महिला इंस्पेक्टर विभा कुमारी को मिली धमकी चालान काटने के बाद।

पटना:सार्वजनिक परिवहन मे 50% से अधिक सवारी ढोए जा रहे हैं।
ओवरलोड सवारिया टैंपू में बैठे हुए रहती हैं। ई रिक्शा में भी कमोवेश यही स्थिति है।
कैसे होगा कोरोना जैसे घातक बीमारी पर नियंत्रण?
2 दिन पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना शहर का मुआयना किया और बिना मास्क पहने लोगों को भी देखा। आम लोगों से अपील कि बीमारी पर नियंत्रण करने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मास्क पहनना भी अनिवार्य है। उन्होंने टीका लेने के लिए भी सबको प्रेरित किया, उनका उत्साहवर्धन भी किया।
बिहार अनलोंक होते हैं शहर में वाहनों का दबाव बढ़ गया जिससे जाम लगना शुरू हो गया। जाम का प्रमुख कारण बीच सड़क पर गाड़ी खड़ा करना एवं अनियंत्रित ढंग से गाड़ी चलाना भी है। ऐसा दृश्य एग्जीबिशन रोड में ऑटो पार्ट्स के विक्रेता एवं गाड़ियों के मरम्मत करने वाले मकैनिक के द्वारा हो रहा है। वाहन चालक गाड़ी खड़ी करके दुकान में सामान लेने के लिए चले जाते हैं पीछे से आने वाले वाहन गाड़ी हटने का इंतजार करते रहते हैं जिससे जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। गाड़ी मरम्मत करने वाले मिस्त्री बीच सड़क पर ही गाड़ी बनाना शुरु कर देते हैं। हालांकि गांधी मैदान ट्रैफिक थाने की पुलिस लगातार पेट्रोलिंग करती रहती है, उनका चालान भी काटती है फिर भी यह लोग सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं जिसके कारण वाहन चलाने वाले चालकों की काफी परेशानी झेलनी पड़ती है वह समय पर कार्यालय या फिर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते हैं इसका मुख्य कारण अतिक्रमण है।
एग्जीबिशन रोड में भट्टाचार्य यातायात पोस्ट के सेक्टर प्रभारी इंस्पेक्टर विभा कुमारी किसी भी गैर कानूनी ढंग से वाहन चलाने वाले चालकों की चालान काटने में कोई कोताही नहीं दिखाती हैं, कारण है कि इस पोस्ट के जवान एवं अधिकारी काफी सक्रियता पूर्वक अपनी ड्यूटी निभाते हैं। कोई भी वाहन चालक बिना सीट बेल्ट, बिना हेलमेट के यहां से गुजर नहीं सकते हैं। हालांकि डबल हेलमेट की चेकिंग यहां कम होती है । आप तस्वीरों के माध्यम से देख सकते हैं कि किस तरह पदाधिकारी खुद से गाड़ियों की चेकिंग कर रही हैं।
महिला सशक्तिकरण की बात होती है लेकिन पटना में महिला थाना छोड़कर, थाने की कमान महिलाओं के हाथों में नहीं दी जा रही है आखिर ऐसा क्यों? क्या महिला थाना चलाने में सक्षम नहीं है या फिर बिहार पुलिस में उस स्तर के महिला पदाधिकारी की कमी है तो इसको कब पूरा किया जाएगा। अभी हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि महिलाओं के पास महिला फरियादी अपनी शिकायत बेहिचक रख सकती है तो फिर देर किस बात का कि पटना के थानों की कमान महिला के हाथों में हो जा।
यातायत पोस्ट के प्रभारी मोबाइल के पैरवी, एवं वाहन मालिकों के धमकी से परेशान है। चालान काटते हैं वाहन मालिक तरह-तरह की बातें करने लगते हैं, कोई वर्दी उतरवाने की , तो कोई चालान कैंसिल करवाने का, कोई बदली करवाने का, कई बार तो रसूखदार लोग का भी फोन आना शुरू होता है, कभी-कभी संबंधित विभाग का भी फोन आता है जो कहीं से उचित नहीं है। ऐसा ही दृश्य आज एग्जीबिशन रोड चौराहा पर प्रत्यक्ष देखने को मिला जहां वाहन चालक बड़े अधिकारियों से बात करने के लिए दबाव बना रहे थे हालांकि तेज तर्रार कड़क महिला इंस्पेक्टर के सामने उनकी एक नहीं चली और अंत में उनको ₹1000 का चालान मिल गया। इस तरह पटना राजधानी में कुछ यातायात पोस्ट को छोड़कर बाकी सभी जगह ट्राफिक पोस्ट प्रभारी काफी सक्रिय है एवं गलत तरीके से वाहन चलाने वाले चालकों की चालान काट देते हैं बल्कि कुछ पदाधिकारी सेटिंग में भी लगे रहते हैं मौका मिलते ही इसका फायदा उठाते हैं इसमें वाहन चालक एवं जवान दोनों की भूमिका संदिग्ध रहती है नहीं तो सरकार को एक बहुत बड़े राजस्व का फायदा हो जाता। यातायात अधीक्षक की निगाहें चारों तरफ रहती है और समय-समय पर इस तरह के अधिकारियों पर कार्रवाई भी हो रही है हालांकि पटना जंक्शन गोलंबर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है जहां पर ड्यूटी करने के लिए यातायात के जवान लालायित रहते हैं आखिर कारण क्या है?

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