जातीय जनगणना के पक्ष में जाप सड़कों पर उतरेगी:राघवेंद्र कुशवाहा

0
115

प्रेस विज्ञप्ति



पटना 24 जुलाई. देश में किसी भी हालत में जाति आधारित जनगणना होनी ही चाहिए. भारतीय संस्कृति में धर्म से भी गहरी जड़े हैं जातियों की. जाति के आधार पर कई तरह की सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, शैक्षणिक और आर्थिक विषमतायें हैं. एक ठोस सरकारी नीति के बगैर असमानताओ को दूर नहीं किया जा सकता है. आज जन अधिकार पार्टी(लो) के प्रदेश अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह कुशवाहा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए उक्त बातें कहीं. उन्होंने कहा कि जाति आधारित जनगणना से न केवल पिछड़ों, दलितों एवं अल्पसंख्यकों को लाभ होगा बल्कि अगड़ी जातियों में भी जो आर्थिक तौर पर कमजोर है उनको भी लाभ होगा.
श्री कुशवाहा ने कहा कि भारत में अंग्रेजों के काल में जातीय जनगणना होती थी. उस अवधि में भी 1931 के बाद से इस तरह की जनगणना बंद हो गई. आजादी के बाद कई बार जातीय जनगणना की मांग उठती रही है लेकिन यह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता रहा है. लंबे संघर्ष के बाद 2010 में एक बार आधा अधूरा जातीय जनगणना हुआ था. उसके बाद फिर 2013 में जातीय जनगणना हुई लेकिन उसको प्रसारित नहीं किया गया.
जाप अध्यक्ष श्री कुशवाहा ने कहा कि 2019 और 2020 में बिहार सरकार ने दो दो बार बिहार विधान मंडल से सर्वसम्मति से इस आशय का प्रस्ताव पारित करवाकर केंद्र सरकार को भेजा था किंतु केंद्रीय सरकार द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी प्रारंभ से ही जातीय जनगणना के पक्ष में है यदि ध्यान नहीं दिया गया तो हम लोग निर्णायक संघर्ष करेंगे.