जाति एकता= अपने लोगो को जोड़ के एक समूह बनाना और फिर आजीवन ऊंच स्थान को कब्जा कर लेना

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लोकतंत्र = लोगो को जोड़ के एक समूह बनाना जिस से वो अपना प्रतिनिधि को एक ऊंच स्थान पर पहुंचा सके ,

अफसोस है या दुर्भाग्य कायस्थ ये राजनीति नही समझ पाया या समझना नही चाहता ।
इतिहास में पहली बार ऐसा माहौल बना हैं की राजनीति ( मंत्रिमंडल ) से कायस्थ का सूपड़ा साफ हो गया । जिन कायस्थों की पीढ़ी दर पीढ़ी राजनीति से भारत भूमि को बचा के रखा कभी बाहरी अतंकारिओ से तो कभी घर के भेदिओ से आज कायस्थ मंत्री ना के बराबर हो गए । कोई इसमें बीजेपी को गाली दे रहा हैं , कोई किसी और को बहाना बना रहा हैं , ये हर इंसान को प्रवृति हैं की वो अपनी गलती हमेशा दूसरे के माथे फोड़ता हैं ।
आज अगर कायस्थ समाज का राजनीति से पतन हुआ हैं तो इसमें गलती एक मात्र बस कायस्थ समाज की हैं , क्युकी दुनिया को दसा और दिशा दिखाने वाले समाज जब किसी दूसरे के पैरो निसान पर चले और अपने समाज के आदर्शो के पैरो के निशान को मिटा दे तो इस समाज का वही होता हैं ।
आखिर लालू प्रसाद यादव , मुलायम सिंह यादव इन लोगो ने भी शुरुवात किया और आज उनके गद्दी के उत्तराधिकारी उनके बच्चे हैं फिर ये कायस्थों के जो नेता बने उनके बच्चे कहां है ?
मैं यहां ये बिल्कुल नही कहूंगा की हमने पहला राष्ट्रपति दिया , प्रधानमंत्री दिया , अनेक स्वतंत्रता सेनानी और महान राजा , संत दिए जिन्होंने अपने विचार से भारत को दिशा दिखाई । क्युकी ये सब बाते सब कोई बोल रहा हैं और ये एक आम बात हैं ।
राजनीति में कायस्थ का पतन तो उस दिन ही हो गया था जब विदेशी जहाज से लाल बहादुर शास्त्री जी की लाश आई थी । क्युकी उसके बाद कायस्थ समाज दुबारा अपना दबदबा नही बना सका ।
जेपी नारायण जी एक लोक क्रांति बने पर वो भी एक अच्छे नेता नही बन सके ।
एक समाज उन्नत बनता हैं अपने पूर्वजों के आदर्श से उनके बताए पैरो के निशान से पर कायस्थ समाज ने एक तो कभी अपने समाज के आदर्शो को अपना आदर्श नही बनाया वही दूसरे लोग उनके नाम पर ना जाने कहां से कहां पहुंच गए ।
एक आदर्श ही एक समाज को आगे ले जाता हैं , कायस्थों की 2-3 पीढ़ी ने बस कमाया और खाया और लुटाया हैं , जिस वजह से उनके बच्चे मतलब आज का कायस्थ समाज के पास एक अच्छा आदर्श नही हैं उनके परिवार में वही दूसरे जातियों ने आजादी के बाद संघर्ष किया और अपने लोगो को हक दिलाया हैं , उनको एक अच्छे जगह पर पहुंचाया , नौकरी , जमीन ,सब चीज दिया जिस से आज उनके समाज में एक आदर्श हैं जिसको देख के वो लोग आज भी खुद को एक पोजिशन में रखे हुए हैं ।
“” अब पछताएं क्या होगा , जब चिड़िया चुग गई खेत””
आज कायस्थ समाज में क्रोध हैं क्युकी उनका वो अंधविश्वास टूटा हैं ,मैने पहले बोला की इन सब की गलती बस कायस्थ समाज की हैं किसी पार्टी की नही , एक पार्टी में या देश में आपका पहचान बनाता हैं आपके नेतत्व करने से पर आप अब बस एक सीट ले कर आराम से बैठना और खुद के पूर्वजों को भूलने लगते हैं , वही अन्य जाति का नेता चाहे वो मोदी हो या मुलायम ये सब खुद की पहचान को नही भूलते हैं जिस से उनके लोग उनसे जुड़ते हैं और एक विश्वास बनाता हैं ।
कभी सोचा जिस समाज ने कई शताब्दी से शासन और प्रशासन में रहा हो आज वो ऐसे हो जायेगा ।
आज भी कुछ बिगड़ा नही हैं । आज भी हालात बदला जा सकता हैं बस खुद में जुड़े , एक कायस्थ नेता को एक आम कायस्थ इंसान से मिलना चाहिए और एक आम इंसान को अपने कायस्थ नेता को याद दिलाना चाहिए की देश पहले हैं पर इस से भी पहले हमे खुद को समाज को उन्नत करना हैं क्युकी राष्ट्र की रक्षा तभी होगी जब आपका घर मजबूत बनेगा ।
आज कायस्थ बीजेपी के तरफ सीट ना मिलने पर किसी और पार्टी के पीछे चलने को बोल रहे हैं , कायस्थों जानो खुद को तुम नेतत्व करने वालो में से हो , तुम यहां किसी के पीछे चलने वालो में से हैं तुम इतिहास में मिसाल कायम करने और उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए हो तुम इतने कमजोर मानसिकता के कैसे हो सकते हो, खुद को पहचानो ।
धर्म , राष्ट्र पर 1200 सालो से हमला हो रहा हैं , पर एक चीज ध्यान दो उस वक्त भी कायस्थों ने अपना सबकुछ निछावर करके इस धरा को बचा के रखा पर जब उन्होंने देखा की जिसके लिए लड़ रहे हैं वह हमे ही खत्म करने के लिए बाहर से हमलावर बुला रहे हैं फिर कायस्थों ने इस वक्त जिंदा रहना उचित समझा और उन्होंने खुद को बचा के रखा हैं , तो धर्म की रक्षा के लिए आपका जीवित और एक ऊंचे पद पर होना जरूरी हैं ताकि आप सब फैसले ले सके । क्युकी जब आपका अस्तित्व ही नहीं रहेगा कोई महत्वपूर्ण स्थान नही होगा तो आप कैसे धर्म और राष्ट्र को बचा पाएंगे। तो सभी कायस्थ से कहना चाहूंगा की देश धर्म को बचाने वाले बस कायस्थ हैं , धर्म देश तभी बचेगा जब सब कायस्थ बचेंगे फिर अपना कर्तव्य समझो और कायस्थों को बचाओ और किसी पार्टी के बंधुआ मजदूर मत बनो उस पार्टी के नेतत्व करने वाला बनो ताकि लोग जाने आपको और आप दुबारा अपना वर्चस्व कायम कर सके ।
आज भी कुछ लोग राजनीति पतन के बाद भी बीजेपी को अच्छा बोल रही हैं की धर्म के रक्षक हैं वो उन लोगो से पूछना चाहूंगा अगर बीजेपी सच में हमारे लिए हिंदुत्व के लिए लड़ रही हैं तो वो अपने MLA क्यू नही बचा पा रही हैं और क्यू बीजेपी के आने से Raw और IB के हेड जो कायस्थ बनते थे वो आज बनिया कैसे बन गए ज्यादा , कैसे यूपी में मुलायम सिंह यादव के वक्त सब जगह यादव और अब राजपूत आ गए ? क्या ये काबिलियत से हुआ हैं ?
अगर जवाब नही हैं तो आप अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़िए और अगर अब भी कोई बहाना हैं तो डूब के मर जाइए नही तो एक दिन जब आपका अंधा विश्वास टूटेगा आप वैसे भी खुद को माफ नही कर पायेगा और अफसोस करेंगे की हमने क्यू नही अपने समाज का साथ दिया ।
“”मैं उसके लिए लड़ता हूं ,जिस से मैं प्यार करूं ।मेरा प्यार उसी से हैं जिस पर मेरी श्रद्धा हो और मेरी श्रद्धा उसी पर रहती हैं जिसका मुझे भली भांति ज्ञान हो
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यदि मानव अधिकार के लिए उचित संघर्ष करने में कोई जाति हिचकिचाती है तो यह उसका दुर्भाग्य हैं , संसार संघर्षमय है । जीवन संग्राम में प्रकृत को सफल होना ही मनुष्यमात्र का उद्देश्य हैं ।अपने स्वत्वो की रक्षा के लिए लड़ना हमारा कर्तव्य हैं । यदि कोई जाति अपने उचित अधिकारों के लिए लड़ने से डरे तो भला किस प्रकार इस संघर्षमय संसार में उसका अस्तित्व चिरस्थायी रह सकता हैं ?
विचार मेरा फैसला आपका की इस दुनिया में नेतत्व करना हैं या बंधुआ मजदूरी 🙏
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एक इंसान के रूप में मेरी उम्र 52-53 साल हो सकती हैं पर मेरे कायस्थ समाज की नही
“मैं रहूं या ना रहूं सदा जीता रहे मेरा कायस्थ समाज “
मैं दिखू या ना दिखूं सदा चमकता रहे मेरा कायस्थ समाज”

मनोज श्रीवास्तव


जय श्री चित्रगुप्त भगवान 🚩
जय कायस्थ 🙏

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